बूझो तो जाने! बिना चूल्हे के खीर बनी, ना मीठी ना नमकीन, थोड़ा-थोड़ा खा गए बड़े-बड़े शौकीन, दिमाग लगाओ जवाब बताओ!

बूझो तो जाने! बिना चूल्हे के खीर बनी, ना मीठी ना नमकीन, थोड़ा-थोड़ा खा गए बड़े-बड़े शौकीन, दिमाग लगाओ जवाब बताओ!, पुराने ज़माने में जब लोगो के पास स्मार्टफोन नहीं हुआ करते थे तब बच्चो का मनोरंजन उसकी दादी-नानी हुआ करती थी। वह हर दिन बच्चो को अच्छी-अच्छी कहानी के साथ में कुछ मजेदार पहेलियाँ भी पुछा करती थी। जिससे बच्चो के मनोरंजन के साथ में उनका मानसिक विकास भी होता था। ऐसे में कुछ-कुछ बुजुर्ग लोग आज भी पहेलियाँ पूछ लेते है। ऐसे ही बच्चो के मानसिक विकास के लिए हम आपके लिए कुछ मजेदार पहेलियाँ लेकर आये है जो आपके दिमाग का पिटारा खोल देगी।

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  • सवाल: लाल हूँ, खाती हूँ मैं सूखी घास। पानी पीकर मर जाऊँ, जल जाए जो आए मेरे पास।
  • जवाब: आग
  • सवाल: बिन खाए, बिन पिए, सबके घर में रहता हूँ । ना हँसता हूँ, ना रोता हूँ, घर की रखवाली करता हूँ।
  • जवाब: ताला
  • सवाल: जन्म दिया रात ने, सुबह ने किया जवान । दिन ढलते ही, निकल गई इसकी जान।
  • जवाब: समाचार पत्र

बूझो तो जाने! बिना चूल्हे के खीर बनी, ना मीठी ना नमकीन, थोड़ा-थोड़ा खा गए बड़े-बड़े शौकीन, दिमाग लगाओ जवाब बताओ!

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  • सवाल: बिना चूल्हे के खीर बनी, ना मीठी ना नमकीन, थोड़ा-थोड़ा खा गए बड़े बड़े शौकीन।
  • जवाब: चूना
  • सवाल: काली हूं पर कोयल नहीं, लंबी हूं पर डंडी नहीं, डोर नहीं पर बांधी जाती, मैया मेरा नाम बताती।
  • जवाब: चोटी

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