Hindi Paheli: बूझो तो जाने! पैर नहीं पर चलती हूँ, कभी न राह बदलती हूँ, नाप-नाप कर चलती हूँ, तो भी न घर से टलती हूँ, यहाँ देखे इसका उत्तर

Hindi Paheli: बूझो तो जाने! पैर नहीं पर चलती हूँ, कभी न राह बदलती हूँ, नाप-नाप कर चलती हूँ, तो भी न घर से टलती हूँ, यहाँ देखे इसका उत्तर, एक समय था जब बच्चे अपने दादा-दादी के पास बैठकर कहानी और पहेलियाँ बुझाया करती थी। जिससे बच्चो के मस्तिष्क का व्यायाम होता था। ऐसे में आजकल बच्चो के पास स्मार्टफोन आने से इन सभी चीजों का दौर खत्म हो गया है लेकिन वह समय अब वापिस नहीं आ सकता लेकिन पहेलियाँ आज भी लोगो को उलझा देती है। कुछ पहेलियाँ तो इतनी अजीब रहती है जिसका जवाब ढूंढने में दिमाग की नसे दर्द देने लगती है। आज हम आपके लिए कुछ ऐसी ही पहेलियाँ जवाब के साथ लेकर आये है। आइये जानते है….

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यहाँ देखे कुछ दिमाग को हिला देने वाली पहेलियाँ जवाब के साथ

  • सवाल: गला है पर सर नहीं, बाहें है पर हाथ नहीं ?
  • उत्तर :– शर्ट
  • सवाल: शहर है पर घर नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं, नदी है पर पानी है?
  • उत्तर :- नक्शा
  • सवाल: दिन में सोये रात को रोये, जितना रोये उतना खोये।
  • उत्तर : मोमबत्ती

Hindi Paheli: बूझो तो जाने! पैर नहीं पर चलती हूँ, कभी न राह बदलती हूँ, नाप-नाप कर चलती हूँ, तो भी न घर से टलती हूँ, यहाँ देखे इसका उत्तर

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  • सवाल: मैं हूँ हरे रंग की रानी, देखकर आये मुँह में पानी। जो भी मुझको चबाएँ, उसका मुँह लाल हो जाए।
  • उत्तर : पान
  • सवाल: पैर नहीं पर चलती हूँ, कभी न राह बदलती हूँ। नाप-नाप कर चलती हूँ, तो भी न घर से टलती हूँ।
  • उत्तर : घड़ी
  • सवाल: एक गुफा के दो रखवाले, दोनों लम्बे दोनों काले।
  • उत्तर: मूंछे

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