पढ़ लिखकर बना इंजीनियर उसके बाद खेती से बन गया करोड़पति देखे पूरा मामला

हरिश धनदेव की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कुछ अलग करना चाहते हैं। राजस्थान के जैसलमेर से ताल्लुक रखने वाले हरिश असल में पढ़े-लिखे किसान हैं। जयपुर से बीटेक करने के बाद उन्होंने दिल्ली के एक कॉलेज में एमबीए की पढ़ाई भी शुरू की थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 2013 में सरकारी नौकरी लगने के बाद बीच में ही उन्हें एमबीए छोड़ना पड़ा।

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सरकारी नौकरी करते हुए भी हरिश का मन नहीं लगा। कुछ अलग करने की ज्वाला उनके दिल में लगातार भड़कती रही। आखिरकार उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और खेती के रास्ते पर चल पड़े। लेकिन खेती भी उन्होंने पारंपरिक तरीके से नहीं की।

खेती में करोड़ों का कारोबार खड़ा किया

हरिश ने साल 2013 के अंत में काफी रिसर्च करने के बाद औषधीय पौधों की खेती करने का फैसला किया। उन्होंने अपने गांव में बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय से 25 हजार एलोवेरा के पौधे मंगवाए और लगभग 10 बीघा जमीन में उनकी खेती शुरू कर दी। आज 700 बीघा जमीन पर एलोवेरा की खेती कर रहे हैं, जिसमें कुछ उनकी अपनी जमीन है और बाकी लीज पर ली हुई है।

शुरुआत में 80 हजार पौधे लगाने वाले हरिश आज 10 लाख से भी ज्यादा एलोवेरा के पौधे उगा रहे हैं। उनकी रेतीली जमीन में उगाए जाने वाले एलोवेरा की खास किस्म ‘बार्बी डेन्सिस’ की राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम द्वारा भी सराहना की गई है। हरिश पतंजलि फूड प्रोडक्ट्स लिमिटेड को हर महीने 150 टन से ज्यादा संसाधित एलोवेरा पल्प भेजते हैं। अब ब्राजील, अमेरिका और हांगकांग से भी उनके एलोवेरा की मांग आने लगी है।

हरिश की मार्केटिंग स्किल ने बदला खेल

जब खेत में एलोवेरा के पौधे लग रहे थे, तब कई लोगों ने कहा कि जैसलमेर में पहले भी कुछ लोगों ने एलोवेरा की खेती की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। फसल खरीदने के लिए कोई नहीं आया, इसलिए उन्होंने अपने खेतों से एलोवेरा के पौधे हटाकर दूसरी फसलें लगा लीं। हरिश बताते हैं कि मन में थोड़ी आशंका जरूर थी, लेकिन पता लगाने पर जानकारी मिली कि खेती तो लगाई गई थी। लेकिन किसान खरीदारों से संपर्क नहीं कर सके। इसलिए कोई खरीदार नहीं आया।

हरिश को जल्द ही समझ आ गया कि उनकी मार्केटिंग स्किल यहां काम आ सकती है। उन्होंने एलोवेरा खरीदने वाली दवा कंपनियों से संपर्क करके उन्हें अपना सप्लायर बना लिया। हरिश धनदेव केवल एक ही किस्म ‘बार्बी डेन्सिस’ एलोवेरा की खेती करते हैं। इस किस्म की मांग हांगकांग, ब्राजील और अमेरिका में है। बार्बी डेन्सिस एलोवेरा का इस्तेमाल लक्जरी कॉस्मेटिक उत्पादों में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। यही कारण है कि व्यापारी उनके खेतों में उगाई गई एलोवेरा की फसल को हाथों-हाथ खरीद लेते हैं।

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इंजीनियर से करोड़पति किसान

हरिश बताते हैं कि शुरुआत में कई बार उन्हें ये ख्याल आता था कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जाए? इसे कैसे बड़ा बनाया जाए? वह कहते हैं कि धीरे-धीरे समय के साथ काम की समझ बढ़ती गई। हरिश ने जैसलमेर जिले में नेचुरल एग्रो नाम से अपनी कंपनी खोली है। अब उनके खेत में लाखों की संख्या में एलोवेरा के पौधे लगे हुए हैं। धनदेव पतंजलि के आधिकारिक सप्लायर हैं

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